धीरे धीरे से भाग --- 16
रिया को मोहन की आँखो मे दीप्ती के लिए बेइंतहा प्यार दिखाई दे रहा था वो देख सकती थी की मोहन को कोई फर्क नहीं पड़ता था की दीप्ती उससे प्यार करें या ना करें पर वो उसके लिए हर वक़्त खड़ा था वो सही हो या गलत वो साथ देता था दीप्ती का,,,,,,
रिया को पहले तो मोहन के ऊपर शक था पर अब उसका शक यकीन में बदलता जा रहा था एक सच्चा इंसान ही ऐसा निस्वार्थ प्यार कर सकता है नहीं तो आजकल का जमाना तो धोखेबाज लोगों से भरा पड़ा है आज कल लोग तो नाजुक कोमल कलियों को कैसे मसाला जाए बस सही सोचा करते है,,,,
झूठे प्यार का दिखावा करते हैं कोमल दिलों से खेला करते हैं पर मोहन उन लोगों से बिल्कुल अलग था रिया बस इतना चाहती थी कि दीप्ति भी इस प्यार को समझे मोहन से अच्छा लड़का उसे जिंदगी में फिर कभी नहीं मिलेगा,,
दीप्ती की शादी भले ही दूसरी जगह हो रही हो पर दीप्ती तो उसे प्यार ही नहीं करती उसके प्यार मे उसे दिखावा नज़र आता है ज़ब दो लोगो की सोच एक नहीं होती तो उनका साथ ज्यादा दिन तक नहीं रहता ऐसे रिश्ते को ख़त्म हो जाना चाहिए आगे चल कर ऐसे रिश्ते नासूर बन जाते है,,,,,,
रिया दीप्ती की ख़ुशी चाहती थी उसने सोचा क्यों ना दीप्ती को भी इस प्यार का एहसास करवाया जाये फिर उसका फैसला जो होगा वो देखा जायेगा,,,,,
रिया दोनों को हँसते हुए देख कर बहुत ख़ुश थी दोनों एक साथ बहुत अच्छे लग रहे थे उसने दोनों की और देखा और धीरे से अपने हाथ को मुँह की तरफ करते हुए थू थू कर रही थी जैसे वो उन दोनों की नज़र उतर रही हो ये करते हुए सिद्धार्थ ने रिया को देख लिया था,,,,,,
उसे रिया को ऐसे करते हुए देख कर उस पर शक होने लगा हो ना हो रिया को भी मोहन की सच्चाई पता चल गयी है पर वो रिया से कुछ नहीं बोला उसने सोचा इस बारे मे रिया से बाद मे बात करेगा अभी समय ठीक नहीं है इस बारे मे बात करने के लिए,,,,
सभी लोग मौज मस्ती करते हुए मनाली पहुंची गयें होटल मे आराम करने के बाद सभी ने डिनर किया और बाहर घूमने निकल गयें रिया मोहन दीप्ती साथ साथ चल रहे थे बाते करते हुए अचानक ही रिया को पता नहीं क्या सूझ की वो उसने अपने कदमो को धीरे कर लिया,,,,,
जिससे वो दोनो एक साथ आ जाए और कुछ अपने कीमती समय को अपनी सुनहरी यादो मे कैद कर ले पता नहीं फिर कभी ये मौका मिले या नहीं! पर उनकी यादो मे ये पल जरूर रहेंगे चाहे दोनों कही भी रहे,,,,,
रिया पीछे हो रही थी तो वो सिद्धांथ से टकरा गयी,,,
सिद्धार्थ बोला अरे यर मार ना ही है तो आगे से मार ना यूँ पीछे से को वार करती है,,,,,,
रिया उसे आँखे दिखाती हुई बोली मेरी आँखे आगे है पीछे नहीं पर तू तो आगे देख रहा था ना तो तुझे ये पांच फूट की लड़की नज़र नहीं आई गलती खुद की और मुझे बोल रहा है,,,,, उल्टा चोर कोतवाल को डांडे?
मै चोर अरे वाह! भैया भये ज़ब सैया हुए कोतवाली तो अब डर काहे का सिद्धाथ ख़ुश होता हुआ बोला रिया उसकी इस हरकत पर और चिढ़ गयी और उसे कान के पीछे एक कंटाप लगा कर निकल गयी आगे,,,,
सिद्धार्थ भी गाना गाता हुआ उसके पीछे चलने लगा
हाय मेरो बालम थानेदार चलावे जिप्सी..
हाय मेरो बालम थानेदार चलावे जिप्सी..
क्या रिया मोहन को उसका प्यार दिलाने मे सफल हो पायेगी अगर हाँ तो कैसे करेंगी वो ये सब क्या दीप्ती मोहन के प्यार को समझ पायेगी और ये क्या चल रहा है रिया और सिद्धार्थ के बीच इन्ही सभी सवालों के जवाब आपको मिलेंगे मेरे अगले एपिसोड मे तो मिलते है अगले अंक मे,,,,,
फेजिया खान